learn astrology / ज्योतिष सीखिए

                                                             श्री गणेशाय नमः

                       ज्योतिष सीखिए / learn astrology

                           गजाननं  भूत गणधिसेवितम , कपिध्वजम फलचारू भक्षणं I

                          उमासुतं शोकविनाशकारकं , नमामि विघ्नेश्वर पाद पंकजम I I


प्रस्तावना -  आदरणीय गुरुवर एवं पिता श्री श्री ओमकार प्रसाद जी के चरण कमलो की वंदना करने के साथ एवम नमन करता हूँ साथ ही इच्छा करता हूँ किउन के आशीर्वाद से मेरे द्वारा दिए गए ज्योतिषिय  ज्ञान से मानव मात्र को लाभ प्राप्त हो सके I  मानव जीवन संघर्षो से सदा भरा रहता हैं I मनुष्य के जीवन में जन्म से मरण तक अनेको उतार चढ़ाव आते रहते हैं I  कोई अमीर तो कोई गरीब होता हैं I इस विषय में मेरा मानना हैं की सब कुछ अपने अपने कर्मो के फलस्वरूप ही मनुष्य का भाग्य का निर्माण होता हैं I जैसे जैसे कर्म मनुष्य अपने जीवन में करता रहता हैं उसी अनुरूप ही भाग्य का निर्माण भी स्वतः ही होता रहता हैं I लाभ, हानि , यश, अपयश, जीवन एवं मरण उसी भाग्य के अनुरूप ही होता हैं I तथापि जीवन में जब जब लाभ यश वृद्धि सूख शांति सम्रद्धि ख़ुशी की प्राप्ति होती हैं तब ज्योतिष पर कोई ध्यान नहीं देता लेकिन जब जब भी जीवन में हानि दुःख अपयश मरण रोग अशांति अवन्नती की प्राप्ति होती हैं तब तब ज्योतिष की ओर मनुष्य का ध्यान जाता हैं I कुछ भी बुरा होने पर उस बुरे समय का क्या करण हैं और किस उपाय से बुरे समय को अच्छे समय में परिवर्तित किया जा सकता हैं , यही सोच प्रायः सभी की होती हैं I बहुत से लोग अपने अच्छे के लिए दूसरो के लिए बुरे उपायों द्वारा दूसरो का बुरा करना चाहते हैं ,उनके लिए मेरी सलाह हैं कि जैसे बीज बोयेगा वैसे ही फल पायेगा I किसी की अमीरी देखकर उससे जलन मत करो अपितु खुश होवो की फलां आदमी अमीर हैं न की रोवो की मैं क्यों गरीब हूँ I जो अमीर हैं उन्होंने अवश्य ही अच्छे कर्म किये होगे और मैं गरीब हूँ तब मैंने अवश्य ही बुरे कर्म किये होंगे जिस कारण मै गरीब हूँ I जो व्यक्ति इस नीति पर चलेगा वह अवश्य ही उस परमेश्वर के बताये मार्ग पर चलेगा I हां , सद कर्म करना और उसके फल को भगवान् पर छोड़ देना ही बुद्धिमानी हैं I मेरे हिसाब से तो यही सर्व श्रेष्ठ उपाय हैं जिस पर चल कर कोई भी मनुष्य अपने जीवन को नयी उंचाई पर ले जा सकता हैं I यधपि यह विषय ज्योतिष का नहीं हैं तथापि मेरी बताई बातो से अगर किसी का जीवन सुधर जाये तब मैं खुद को भी धर्म का वाहक मानूंगा I  अब अधिक विस्तार में न जाकर ज्योतिष सीखिए के अंतर्गत प्रथम चरण का प्रारंभ करता हूँ I 
      पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती हैं  जिसमे एक वर्ष में सूर्य का एक चक्कर लगता हैं और सूर्य का एक चक्कर लगाते हुए अपनी धुरी परएक वर्ष में ३६५ चक्कर लगाती हैं I २४ घंटे में पृथ्वी अपनी धुरी पर एक चक्कर लगाती है I लगभग ३० दिन का एक माह और बारह माह में एक वर्ष होता हैं I

        पंचांग देखना---   सर्व प्रथम ज्योतिष सिखने से पहले पंचांग देखना सीखना अति आवश्यक हैं I पंचांग से हमें पांच महत्वपूर्ण जानकारियां  मिलती हैं सबसे पहले तिथि वार नक्षत्र योग और करण की जानकारी के लिये पंचांग  होता हैं I  तिथि देखने के लिए तिथि के साथ वह तिथि कितने समय तक उस दिन रहेगी , का विवरण होता हैं बाद वार दिया होता हैं इसके बाद तीसरा अंग नक्षत्र होता हैं नक्षत्रो के नाम के साथ नक्षत्र उस दिन कितने समय तक रहेगा इसके बारे में भी लिखा रहता हैं , नक्षत्रो के नाम आगे दिए जाएगे I पंचांग का प्रमुख चतुर्थ अंग योग होता हैं योग के नाम के आगे कालम में योग कितने समय तक उस दिन रहेगा , ये लिखा रहता हैं योगो के नाम भी आगे दिए जायेंगे I पंचांग का पांचवा प्रमुख अंग कर  हैं , करण के नाम के साथ उस दिन कितने समय तक वह कारन रहेगा वह समय लिखा होता हैं I इसके आलावा पंचांग में दिन मान` दिया जाता हैं जिस में सूर्य उदय के बाद सूर्यास्त तक कितने कितने समय तक दिन रहेगा , इसका विवरण होता हैं I इसके बाद के कालम में सूर्योदय का तथा सूर्यास्त का समय लिखा होता हैं I इसके बाद हिंदी मुस्लिम और अंग्रेजी तारीखे दी हुई होती हैं I इसके बाद अगले कालम में चन्द्रमा किस राशि में कितने समय तक रहता हैं , इसकी जानकारी दी गयी होती हैं I इसके बाद के कालम में सूर्य कितने अंश कला  विकला एक निश्चित समय तक बीत चूका हैं , ये लिखा होता हैं और अंत में उस दिन के गृह राशि नक्षत्र परिवर्तन, उस दिन के व्रत त्यौहार आदि का विवरण भद्रा पंचक आदि का विवरण दिया जाता है I इस प्रकार पंचांग देखा जाता हैं Iइसके अलावा पंचांग में सभी विवाह आदि के मुहूर्त आदि दिए गए होते हैं I पंचांग में लग्न सारणी भी दी गयी होती हैं जिसमे प्रति दिन किस समय से किस समय तक कौन सा लग्न व्यतीत होता हैं उसका समय लिखा रहता हैं I क्युकी एक दिन में चौबीस घंटे का समय होता हैं I और राशिया बारह होती हैं I उस हिसाब से प्रत्येक लग्न लगभग दो घंटे का होता हैं I हमेशा जिस राशि में सूर्य होता हैं , उसी राशि का लग्न प्रथम होता हैं उसके बाद की राशि में क्रमशः लगभग दो दो घंटे अगली राशियों में लग्न चलते रहते हैं I

         बारह महीनों के नाम -

         सर्व प्रथम ज्योतिष के अनुसार वर्ष में बारह माह होते हैं I वर्ष का प्रथम माह नाम चैत्र कहलाता हैं इस माह को राशि अनुसार मीन और पर्यायवाची नाम मधु भी होता हैं जिसका विवरण भारतीय ज्योतिष की पुस्तकों में आता हैं I हिंदी पंचांगों में चैत्र शुदी पक्ष से नव वर्ष का प्रारंभ होता हैं जोकि १५ दिन का होता हैं I और वर्ष के अंत में भी चैत्र माह का बदी पक्ष आटा हैं I इसी प्रकार दूसरा माह वैशाख कहलाता हैं इसका राशि नाम मेष और पर्यायवाची नाम माधव हैं I हिंदी वर्ष के तीसरे माह का नाम ज्येष्ठ हैं I इस माह का राशि नाम वृष होता हैं I पर्यायवाची नाम शुक्र भी होता है I चौथे माह का हिंदी नाम आषाढ़ हैं इसका राशि नाम मिथुन तथा पर्याय वाची नाम शुची हैं I वर्ष के पांचवे माह का नाम श्रावण तथा राशि नाम कर्क व् पर्यायवाची नाम नभ है I वर्ष के छठे माह का नाम भाद्रपद तथा राशि नाम सिंह व् पर्यायवाची नाम नभश्य है I सातवें माह का नाम आश्विन  तथा राशि नाम कन्या व पर्यायवाची नाम कुवार और ईश् भी है I वर्ष के आठवे माह का नाम कार्तिक तथा राशि नाम तुला व् पर्यायवाची नाम उर्ज हैं I नवं माह का नाम मार्गशीर्ष तथा राशि नाम वृश्चिक व् पर्यायवाची नाम सह है I वर्ष के दसवें माह का नाम पौख हैं इसका राशि नाम धनु व पर्यायवाची नाम सहस्य है I वर्ष के ग्यारहवे मान का नाम माघ तथ राशि नाम मकर है और पर्यायवाची नाम तप हैं I वर्ष का बारहवा नाम फाल्गुन तथा राशि नाम कु म्भ व् पर्यायवाची नाम तपश्य होता हैं I  इस प्रकार बारह माह होते है I      

         सप्ताह में दिनों के नाम- एक सप्ताह में सात दिन होते हैं दिनों के नाम -रविवार , सोमवार, मंगलवार, बुधवार , गुरूवार, शुक्रवार, शनिवार , इस प्रकार सात वार होते हैं I जिस ग्रह के नाम पर जो वार होता हैं उसका  प्रतिनिधित्व वही ग्रह करता हैं I 

         तिथियों के नाम - एक माह में औसत ३० दिन होते हैं I तीस दिनों में दो पक्ष होते हैं I प्रत्येक पक्ष में १५ -१५ दिन के लगभग होते हैं I माह का प्रथम पक्ष कृष्ण पक्ष होता हैं और दूसरा पक्ष शुक्ल पक्ष होता हैं I तिथियों के नाम -१- प्रतिपदा पड़वा या एकम , २-दोयज  या द्वितीया,3-तीज या तृतीया , ४- चतुर्थी या चौथ , ५-पंचमी , ६- छठ या षष्ठी , ७- साते या सप्तमी , ८-आठे या अष्टमी , ९-नौमी या नवमी, १०-दशमी , ११-एकादशी , १२- द्वादशी , १३- तेरस या त्रियोदशी , १४- चौदस या चतुर्दशी,  - ३०-अमावस्या I  अमावस्या कृष्ण पक्ष की तीसवी तिथि होती हैं और शुक्ल पक्ष की पंद्रहवी तिथि को पूर्णमासी या पूर्णिमा कहते हैं I अमावस्या के दिन चन्द्रमा दिखाई नहीं देता हैं जबकि पूर्णिमा को चंद्रमा  पूर्ण आकार में दिखाई पड़ता हैं Iइसके बाद धीरे धीरे चन्द्रमा का आकार घटता जाता हैं I पूर्णिमा के अगले दिन से कृष्ण पक्ष का आरम्भ हो जाता हैं , इसी प्रकार अमावस्या के अगले दिन से शुक्ल पक्ष का आरम्भ हो जाता हैं I बीच में तिथियों का क्षय तथा तिथि वृद्धि भी होती हैं I

         अट्ठाईस नक्षत्रों के नाम- पंचांग में त्रितीय मुख्य अंग नक्षत्र होते हैं I किस दिन कौन सा नक्षत्र चल रहा होता है ये पंचांग से जाना जा सकता हैं I कुल मिलाकर २८ नक्षत्रो के नाम इस प्रकार हैं - १- अश्विनी , २-भरणी , 3- कृतिका , ४- रोहिणी ५- मृगशिरा , ६-आर्द्रा , ७-पुनर्वसु , ८- पुष्य, ९-श्लेषा , १०-मघा ११-पूर्वाफाल्गुनी ,१२-उत्तराफाल्गुनी १३- हस्त, १४ - चित्रा , १५ - स्वाति , १६-विशाखा १७-अनुराधा , १८-ज्येष्ठा , १९- मूल, २०- पूर्वाषाढ़ २१-उत्तरा षIढ ,२२- अभिजित  २३- श्रवण २४-धनिष्ठा , २५- शतभिषा , २६-पूर्वाभाद्रपदा , २७- उत्तराभाद्रपदा , २८- रेवती , इस प्रकार कुल अठाईस नक्षत्र होते हैं I नक्षत्रो के नाम याद करने चाहिए Iइनमे अभिजित नक्षत्र गुप्त रहता हैं  I जब किसी बच्चे का जन्म होता हैं तब जन्म नक्षत्र के आधार पर ही उसका नाम निकाला जाता हैं , नक्षत्र के आधार पर ही बच्चे के पाये तथा मूल संज्ञा देखी जाती हैं I जिसके बारे में आगे लिखा जायेगा I    

         हम यहाँ पर केवल भारतीय पद्धति से जन्म पत्रिका का विश्लेषण करेंगे. जो की जन्म की चन्द्र राशि से संचालित होती हैं . ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बारह राशियां होती हैं . बारह राशियों की ही तरह बारह ही लग्न होते हैं I जिस राशि में चन्द्रमा जन्म के समय चल रहा होता हैं उसी राशि को उस व्यक्ति की जन्म राशि माना जाता हैंI लग्न सूर्य के आधार पर निर्धारित होता हैं I प्रथ्वी के चारो ओर के भाग को १२ भागो में विभाजित किया जाता हैं I तदनुरूप ही लग्न का निर्धारण किया जाता हैं I हर भाग को लगभग २ घंटे का समय मिलता हैं I जिस दिन सूर्य नयी राशि में प्रवेश करता हैं उस दिन सूर्योदय से प्रारंभिक २ घंटे लगभग वही लग्न रहता हैं उसके बाद अगली राशि का लग्न रहता हैं इस तरह लगभग हर २ घंटे बाद क्रमशः लग्न बदलता रहता हैं I जिस लग्न में जन्म होता हैं उसी को प्रथम भाव भी मान लिया जाता हैं I जिसको तनु भाव या प्रथम भाव कहते हैं I